ALL मध्यप्रदेश देश राजनीति धर्म मनोरंजन खेल व्यापार
6 लाख नहीं दिए तो बेटे को उठा लेंगे...
March 14, 2020 • ajay dwivedi • मध्यप्रदेश

फिरौती की चिट्ठी देने के दो आरोपी गिरफ्तार
kamlesh pandey
छतरपुर। 6 लाख रुपए बताए गए स्थान पर न देने पर इकलौते बेटे का अपहरण करने और इसके बाद फिर 20 लाख रुपए में छोडऩे की धमकी वाली चिट्ठी मिलते ही बेटे के पिता के हाथ पैर फूल गए। उसने तत्काल चिट्ठी के बारे में पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ आईपीसी की धारा 387, 507, 34 के तहत कार्यवाही कर फिरौती वसूलने वालों को दबोचने के लिए तार जोडऩे शुरु कर दिए। आखिरकार मामले के दो आरोपी गिरफ्तार कर पूरे प्रकरण का खुलासा कर दिया गया है।

ओरछा रोड टीआई अरविंद सिंह दांगी ने बताया कि धमौरा निवासी मनीराम कुशवाहा के घर के बाहर लगे बिजली के मीटर में एक कागज फंसा था। जिसे निकालकर देखा गया तो उसमें लिखा था कि तुम्हारा बेटा इकलौता है और यदि 6 लाख रुपए उसके बताए स्थान पर नहीं पहुंचाए तो 15 मार्च तक बेटे को उठा लिया जाएगा और इसके बाद 20 लाख रुपए में छोड़ा जाएगा। टीआई श्री दांगी ने बताया कि मनीराम कुशवाहा की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरु की गई थी और जांच के दौरान खुलासे तक पहुंचने में कामयाबी मिल गई। आरोपी बाबूलाल पुत्र बिहारी लाल कुशवाहा व महेन्द्र सैनी निवासी धमौरा को गिरफ्तार किया गया है। बाबूलाल मनीराम का चचेरा भाई है।
फोन पर फिरौती की बात करनी चचेरी भाई को ले गई हवालात
ओरछा रोड टीआई अरविंद सिंह दांगी ने बताया कि सुबह 9 मार्च को फिरौती की चिट्ठी मनीराम को मिलती है और शाम को एक अंजान नंबर से पैसे का इंतजाम करने की धमकी मिलती है। पुलिस इसी कड़ी से जांच को आगे बढ़ाती है और मुखबिरों के सहारे आरोपियों तक पहुंच जाती है। टीआई श्री दांगी ने बताया कि बाबूलाल कुशवाहा पीडि़त मनीराम का चचेरा भाई है। वह मोटरसाईकिल से छतरपुर फब्बारा चौक आया जहां से एक मजदूर को काम करने के बहाने अपने घर ले गया और उसी के मोबाइल से मनीराम को फोन लगाया था। मजदूर की सिम लेने की रिपोर्ट कोतवाली में भी की गई थी। संदेह के आधार पर बाबूलाल को पकड़ा गया और पूछताछ की गई तो उसने अपने साथी महेन्द्र के साथ मिलकर षडयंत्र रचना स्वीकार किया।
बंटवारे में कीमती जमीन न मिलने से नाराज था बाबूलाल
पुलिस को पूछताछ में बाबूलाल कुशवाहा ने बताया कि सड़क किनारे की कीमती जमीन उसके पिता को मिलने की बजाय मनीराम के पिता और उसके चाचा को मिल गई थी। मनीराम जमीन को बेचने की फिराक में था इसलिए उसने यह कहानी रची ताकि जमीन की कुछ रकम उसे भी मिल सके।