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आदिवासी परमपरानुसार मनाया जायेगा आज गल पर्व 
March 9, 2020 • ajay dwivedi • मध्यप्रदेश

मचान पर हवा में घुमेंगे मन्नतधारी
noman khan
झाबुआ। भगोरिये पर्व के साथ ही आदिवासी ग्रामीणो में होली के पर्व को लेकर भी खाफी उत्साह देखने को मिलता है। जहां यह मान्यता है कि आदिवासी परम्परानुसार ग्रामीणो के द्वारा गल देवता से अपने एवं परिवार की खुशहाली के लिये मन्नत ली जाती है ओर मन्नत पुरी होते ही 30 फुट उचे गल पर गल देवता की पुजा अर्चना कर उस पर खुदको बांधकर गल के चारो ओर उपर हवा मे घुमाया जाता है। आदिवासी अंचलो में मान्यता है कि मन्नत पुरी होने पर गल देवता को बकरे की बली के साथ ही गल के उपर मन्नतधारी को बांधकर गोल घुमाया जाता है। इसके साथ ही भगोरिये पर्व के दौरान से ही मन्नतधारी अपने शरीर में हल्दी लगाकर अपनी खुशी का इंजहार करना शुरू कर देते है। इन दिनो बाजारो में ग्रामीण मन्नतधारी अपने शरीर पर हल्दी लगाकर अपनी मन्नत को पुरा करने की खुशी जाहिर करते हुये दिखाई देते है। जिले भर में होलीका दहन के दूसरे दिन ग्रामीण जन मनाते है गल बाबजी का त्यौहार (गल पर्व ) कालेज मैदान के निकटं ग्रामीणों द्वारा गल का त्यौहार मनाया गया, यहाँ आसपास के क्षेत्र के मन्नत धारी भी पहुचते है सभी अपनी मानता पूरी करने गल घूमते है

यह है प्रथा
इसमें मन्नत धारी गल घूमता है जिसमे आसपास के गाँवो से अपने परिवारजन व गांव वालो के साथ मन्नत धारी मन्नत पूरी करने गल स्थल पहुचता है गल स्थल पर एक दिन का मेला लगता है जिसमे ग्रामीणजन नाच गाकर झूले चकरी इत्यादि का आनन्द उठाते है। मान्यता है की ग्रामीण यह त्यौहार मन्नत धारी की मानता पूरी करने के लिए मनाते है जिससे परिवार में सुख-समृद्धि आती है और स्वास्थ्य सम्बन्धी सारी परेशानिया दूर होती है।
हवा में झूलते हुए 5 से 7 परिक्रमा करते हैं
मान्यता है कि मन्नत विवाहित व्यक्ति ही उतार सकता है, इसलिए बहुत से मन्नतधारियों के परिजन ने इस परंपरा का निर्वहन किया। तड़वी ने मन्नतधारियों को गल पर घूमाया।मन्नतधारी को कमर के बल रस्सी से बांधा जाता है। फिर मन्नत के अनुसार वह गल देवरा की जय करते हुए हवा में झूलते हुए 5 से 7 परिक्रमा करता है।
       इस में एक रस्म में करीब 30 फीट ऊंचे गल (लकड़ी की चैकी पर ) पर कमर के बल झूलते हुए देवता के नाम के नारे लगाए जाते हैं । धुलेंडी पर बिलीडोज गांव में गल पर्व के दौरान यह नजारा देखने को मिलेगा । दर्जनो  ग्रामीण यहां अपनी मन्नतपूरी करने पहुंचेगें । किसी के यहां गल देवता की मन्नत के बाद संतान हुई थी तो कोई बीमारी से ठीक हुआ था।